भारत में शेयर बाज़ार की बात की जाए तो सबसे पहले जिस नाम का ज़िक्र होता है, वह है सेंसेक्स (Sensex)। सेंसेक्स न केवल भारत का बल्कि एशिया के सबसे पुराने और विश्वसनीय शेयर बाज़ार सूचकांकों में से एक है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार की सेहत को दर्शाने वाला एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।
सेंसेक्स क्या है?
सेंसेक्स का पूरा नाम Sensitive Index है। यह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक (Index) है। सेंसेक्स में BSE में सूचीबद्ध 30 बड़ी, मजबूत और प्रतिष्ठित कंपनियाँ शामिल होती हैं। ये कंपनियाँ भारत के विभिन्न प्रमुख सेक्टरों जैसे बैंकिंग, आईटी, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, फार्मा आदि का प्रतिनिधित्व करती हैं।
सेंसेक्स का आंकड़ा इन 30 कंपनियों के शेयर मूल्यों में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर ऊपर या नीचे जाता है।
सेंसेक्स कैसे काम करता है?
सेंसेक्स की गणना फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति से की जाती है।
फ्री-फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन का मतलब है।
- कंपनी के वही शेयर गिने जाते हैं जो आम जनता के लिए ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होते हैं
- प्रमोटर्स, सरकार या संस्थागत निवेशकों के लॉक-इन शेयर इसमें शामिल नहीं होते
इस पद्धति से बड़ी कंपनियों का सेंसेक्स पर ज़्यादा प्रभाव पड़ता है। अगर रिलायंस या HDFC बैंक जैसे बड़े स्टॉक में तेज़ी आती है, तो सेंसेक्स भी तेज़ी से ऊपर जाता है।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियाँ
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियाँ समय-समय पर बदली जाती रहती हैं ताकि सूचकांक बाज़ार की वास्तविक स्थिति दिखा सके। कुछ प्रमुख कंपनियाँ हैं।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज़
- टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)
- HDFC बैंक
- ICICI बैंक
- इंफोसिस
- भारती एयरटेल
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T)
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
ये कंपनियाँ अपने-अपने सेक्टर में लीडर मानी जाती हैं।
सेंसेक्स क्यों महत्वपूर्ण है?
सेंसेक्स का महत्व कई कारणों से है:
- बाज़ार की दिशा बताता है
अगर सेंसेक्स बढ़ रहा है, तो माना जाता है कि शेयर बाज़ार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। - निवेशकों का भरोसा दर्शाता है
सेंसेक्स में तेजी निवेशकों के आत्मविश्वास को दिखाती है। - आर्थिक स्थिति का संकेत
सेंसेक्स का सीधा संबंध देश की अर्थव्यवस्था से होता है। - नीति निर्धारण में सहायक
सरकार और रिज़र्व बैंक भी सेंसेक्स के ट्रेंड पर ध्यान देते हैं।
सेंसेक्स ऊपर-नीचे क्यों होता है?
सेंसेक्स में उतार-चढ़ाव कई कारणों से होता है।
- कंपनियों के तिमाही नतीजे
- ब्याज दरों में बदलाव
- महंगाई और GDP ग्रोथ
- सरकार की नीतियाँ और बजट
- अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों का प्रभाव
- युद्ध, महामारी या वैश्विक संकट
सेंसेक्स और निफ्टी में अंतर।
| बिंदु | सेंसेक्स | निफ्टी |
|---|---|---|
| एक्सचेंज | BSE | NSE |
| कंपनियाँ | 30 | 50 |
| शुरुआत | 1986 | 1996 |
| आधार वर्ष | 1978-79 | 1995 |
दोनों सूचकांक भारत के शेयर बाज़ार की स्थिति दिखाते हैं।
सेंसेक्स में निवेश कैसे करें?
सेंसेक्स में सीधे निवेश नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके ज़रिए निवेश किया जा सकता है।
- म्यूचुअल फंड (Index Fund)
- ETF (Exchange Traded Fund)
- सेंसेक्स की कंपनियों के शेयर खरीदकर
इसके लिए निवेशक को:
- डीमैट अकाउंट
- ट्रेडिंग अकाउंट
- बैंक अकाउंट
की आवश्यकता होती है।
सेंसेक्स में निवेश के फायदे।
- लॉन्ग टर्म में अच्छा रिटर्न
- जोखिम कम (क्योंकि बड़ी कंपनियाँ शामिल)
- अर्थव्यवस्था के साथ ग्रोथ
- पारदर्शिता और भरोसा
सेंसेक्स में निवेश के जोखिम।
- शॉर्ट टर्म में तेज़ गिरावट
- वैश्विक संकट का असर
- मार्केट रिस्क
- भावनाओं में बहकर निवेश करने का खतरा
इसलिए निवेश हमेशा लंबे समय और समझदारी से करना चाहिए।