आज के समय में श्वसन संबंधी रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) और अस्थमा दो प्रमुख बीमारियाँ हैं, जो फेफड़ों को प्रभावित करती हैं और व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को काफी हद तक कम कर देती हैं। सही जानकारी, सावधानी और जीवनशैली में सुधार करके इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
सीओपीडी और अस्थमा क्या हैं?
सीओपीडी एक दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें सांस की नलियाँ संकरी हो जाती हैं और फेफड़ों में सूजन आ जाती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई, लगातार खांसी और बलगम बनता है। यह बीमारी समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ती है।
अस्थमा एक एलर्जिक या सूजन संबंधी बीमारी है, जिसमें सांस की नलियाँ अचानक सिकुड़ जाती हैं। इसके लक्षणों में सांस फूलना, सीने में जकड़न, घरघराहट और खांसी शामिल हैं। अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है।
सीओपीडी और अस्थमा से बचाव के उपाय
1. धूम्रपान से पूरी तरह दूरी
धूम्रपान सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण है। सिगरेट, बीड़ी, हुक्का या किसी भी प्रकार का तंबाकू फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।
निष्क्रिय धूम्रपान (Passive Smoking) भी उतना ही खतरनाक है, इसलिए धूम्रपान करने वालों से दूरी बनाए रखें।
2. प्रदूषण से बचाव
- अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क का प्रयोग करें
- घर के अंदर हवादार वातावरण रखें
- किचन में चिमनी या एग्जॉस्ट फैन का उपयोग करें
- सुबह-शाम जब प्रदूषण अधिक हो, बाहर जाने से बचें
3. एलर्जी से बचाव
अस्थमा के मरीजों के लिए एलर्जी बहुत बड़ा ट्रिगर होती है।
- घर में धूल जमा न होने दें
- बिस्तर और पर्दों को नियमित धोएँ
- पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखें
- तेज खुशबू, अगरबत्ती और परफ्यूम से बचें
4. नियमित व्यायाम और योग
हल्का-फुल्का व्यायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
प्राणायाम और योगासन जैसे:
- अनुलोम-विलोम
- कपालभाति
- भ्रामरी
- ताड़ासन
ये सभी श्वसन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और सांस की तकलीफ कम करते हैं।
5. संतुलित और पौष्टिक आहार
- हरी सब्जियाँ और फल खाएँ
- विटामिन C और E से भरपूर भोजन लें
- ओमेगा-3 फैटी एसिड (अलसी, अखरोट)
- अधिक तला-भुना और जंक फूड न खाएँ
- पर्याप्त पानी पिएँ
अच्छा पोषण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
6. संक्रमण से बचाव
- सर्दी-खांसी को नजरअंदाज न करें
- हाथों की सफाई रखें
- भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें
- डॉक्टर की सलाह से फ्लू और न्यूमोनिया का टीका लगवाएँ
7. समय पर जांच और दवा
यदि सांस फूलना, खांसी या घरघराहट बार-बार हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- दवाएँ नियमित लें
- इनहेलर का सही तरीके से उपयोग करें
- खुद से दवा बंद न करें
8. मानसिक तनाव कम करें
तनाव और चिंता अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकते हैं।
- ध्यान (Meditation) करें
- पर्याप्त नींद लें
- सकारात्मक सोच रखें
9. कार्यस्थल पर सावधानी
जो लोग फैक्ट्री, खदान या केमिकल उद्योग में काम करते हैं:
- सुरक्षा मास्क और उपकरण पहनें
- कार्यस्थल पर वेंटिलेशन सही हो
- समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएँ
10. बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान
- बच्चों को धुएँ और प्रदूषण से दूर रखें
- बुजुर्गों की नियमित जांच कराएँ
- घर में स्वच्छ वातावरण बनाए रखें