पैनक्रियाटाइटिस (Pancreatitis)
यह पैनक्रियास की सूजन होती है।
प्रकार:
(a) तीव्र पैनक्रियाटाइटिस (Acute)
- अचानक होता है
- तेज पेट दर्द (ऊपरी पेट में, पीठ तक फैल सकता है)
- उल्टी, मतली
- बुखार
(b) पुराना पैनक्रियाटाइटिस (Chronic)
- लंबे समय तक रहने वाली समस्या
- बार-बार पेट दर्द
- वजन कम होना
- पाचन ठीक से न होना
- डायबिटीज हो सकती है
कारण:
- ज्यादा शराब पीना
- पित्त की पथरी (Gall stones)
- चोट या संक्रमण
2. पैनक्रियाटिक कैंसर (Pancreatic Cancer)
यह पैनक्रियास का कैंसर होता है, जो अक्सर देर से पकड़ में आता है।
लक्षण:
- वजन तेजी से कम होना
- भूख न लगना
- पीलिया (आँख और त्वचा पीली होना)
- पेट या पीठ में दर्द
- कमजोरी
3. डायबिटीज (Diabetes)
पैनक्रियास इंसुलिन बनाता है। जब यह सही से काम नहीं करता तो डायबिटीज हो जाती है।
प्रकार:
- टाइप 1 डायबिटीज
- टाइप 2 डायबिटीज
लक्षण:
- बार-बार पेशाब आना
- ज्यादा प्यास लगना
- थकान
- घाव देर से भरना
4. पैनक्रियाटिक सिस्ट (Pancreatic Cyst)
पैनक्रियास में पानी भरी गाँठ बन जाती है।
लक्षण:
- कई बार कोई लक्षण नहीं
- पेट दर्द
- सूजन
5. पाचन एंजाइम की कमी
पैनक्रियास से पाचन एंजाइम कम बनें तो:
- खाना ठीक से न पचना
- दस्त
- चिकना मल
- वजन कम होना
कब डॉक्टर को दिखाएँ?
- लगातार पेट दर्द
- बिना कारण वजन कम होना
- पीलिया
- बार-बार उल्टी
पैंक्रियास (अग्नाशय) की बीमारियों से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं। पैंक्रियास शरीर के लिए बहुत जरूरी अंग है क्योंकि यह इंसुलिन, एंजाइम्स और अन्य महत्वपूर्ण पदार्थों का उत्पादन करता है जो पाचन और शुगर नियंत्रण में मदद करते हैं। यहां कुछ टिप्स हैं जिनसे पैंक्रियास की बीमारियों से बचा जा सकता है:
1. स्वस्थ आहार
- फाइबर युक्त आहार: ताजे फल, सब्जियां, और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं। यह आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और पैंक्रियास की कार्यप्रणाली को सपोर्ट करता है।
- कम वसा वाला भोजन: अत्यधिक वसा, विशेष रूप से ट्रांसफैट्स और सैचुरेटेड फैट्स से बचें। इनका सेवन पैंक्रियास पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
- मध्यम शक्कर का सेवन: अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर के इंसुलिन के स्तर को प्रभावित कर सकता है, जिससे पैंक्रियास पर दबाव बढ़ता है। शुगर और मिठाइयों का सेवन नियंत्रित करें।
- पानी का अधिक सेवन: हाइड्रेटेड रहना पैंक्रियास के सही काम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
2. व्यायाम और शारीरिक सक्रियता
- नियमित रूप से व्यायाम करने से रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रहता है और पैंक्रियास को अतिरिक्त काम नहीं करना पड़ता। वॉक, दौड़, योग, या हल्की-फुल्की जिम एक्सरसाइज मदद कर सकती है।
- वजन को नियंत्रित रखना भी पैंक्रियास के लिए लाभकारी है, क्योंकि अधिक वजन से शुगर और इंसुलिन संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
3. धूम्रपान और शराब से बचाव
- धूम्रपान पैंक्रियास के लिए बहुत हानिकारक है। यह पैंक्रियास के कैंसर, सूजन, और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
- अत्यधिक शराब का सेवन पैंक्रियास की सूजन (पैन्क्रिएटाइटिस) और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न कर सकता है। शराब का सेवन सीमित या पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए।
4. दवाइयों का ध्यानपूर्वक सेवन
- यदि आपको कोई बीमारी है, जैसे कि मधुमेह (डायबिटीज), तो उसे नियंत्रित रखने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाइयाँ लें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवाई या सप्लीमेंट्स न लें, क्योंकि यह पैंक्रियास पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
5. तनाव कम करें
- मानसिक तनाव भी पैंक्रियास पर असर डाल सकता है। तनाव को कम करने के लिए ध्यान, योग, और मानसिक विश्राम की तकनीकों का अभ्यास करें।
6. नियमित मेडिकल चेकअप
- पैंक्रियास की किसी भी समस्या के संकेत मिलने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित चेकअप और रक्त परीक्षण से आपकी सेहत पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, खासकर अगर आपको पहले से कोई शुगर या पाचन से संबंधित समस्याएं हैं।
इन सरल उपायों को अपनाकर आप पैंक्रियास की बीमारियों से बच सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।