आजकल के दौर में स्वास्थ्य सेवाएं तेजी से बदल रही हैं, लेकिन एक बात जो कई बार सवाल खड़ा करती है, वह है डॉक्टरों द्वारा अधिक दवाइयां लिखने की प्रवृत्ति। अक्सर मरीजों को यह अनुभव होता है कि इलाज के नाम पर डॉक्टर उन्हें दवाइयों का एक लंबा सिलसिला लिखकर दे देते हैं, जिनकी शायद कोई आवश्यकता नहीं होती। यह समस्या जटिल है और इसके कई पहलू हो सकते हैं।
1.दवाइयों पर निर्भरता:
आजकल की चिकित्सा पद्धतियों में, विशेष रूप से पश्चिमी चिकित्सा में, दवाइयां एक प्रमुख भूमिका निभाती हैं। डॉक्टर का यह मानना हो सकता है कि दवाइयां जल्दी से रोग को ठीक करने में मदद करती हैं और मरीज को त्वरित राहत मिलती है। कभी-कभी, जब रोगी के पास समय या संसाधन नहीं होते, तो डॉक्टर दवाइयों का सहारा लेते हैं, ताकि मरीज को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
2.मरीज की अपेक्षाएं:
कई बार, मरीज यह अपेक्षाएं लेकर डॉक्टर के पास आते हैं कि उन्हें तुरंत कोई इलाज या दवा मिलनी चाहिए। यदि डॉक्टर उन्हें बिना दवा के भेजते हैं, तो मरीज यह महसूस कर सकते हैं कि उनका इलाज अधूरा है या डॉक्टर ने पूरी तरह से उनका ध्यान नहीं रखा। इस मानसिकता को समझते हुए डॉक्टर यह निर्णय लेते हैं कि उन्हें दवा देना जरूरी है, ताकि मरीज को संतुष्टि मिल सके।
3.मेडिकल किट का दबाव:
वर्तमान में, चिकित्सा पेशेवरों के लिए भी एक तरह का दबाव होता है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मेडिकल उपकरणों और दवाओं का बहुत बड़ा भंडार होता है। डॉक्टरों पर समय की भी कमी होती है, और कई बार वे सबसे जल्दी इलाज का रास्ता दवाइयों में देखते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ दवाइयों के लिए कमीशन और प्रोत्साहन भी एक कारण हो सकता है, जो डॉक्टर को अधिक दवाइयां लिखने के लिए प्रेरित कर सकता है।
4.शोध और विकास:
वैज्ञानिक शोध और नई दवाओं का लगातार विकास हो रहा है। कई बार डॉक्टरों के पास नई दवाइयों का विकल्प होता है, जो पुराने इलाज की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती हैं। इस वजह से डॉक्टर न केवल पुरानी, बल्कि नई दवाइयों को भी मरीजों को देने में संकोच नहीं करते। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि यह दवाइयां सभी मरीजों के लिए उपयुक्त हों।
5.सही दवा की पहचान में कठिनाई:
कभी-कभी, डॉक्टर को यह सुनिश्चित करने में कठिनाई हो सकती है कि कौन सी दवा सही है। यदि एक दवा से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते, तो डॉक्टर मरीज को दूसरी दवाइयां लिख सकते हैं, ताकि बेहतर परिणाम प्राप्त किया जा सके। इसके अलावा, कई बार मरीज के लक्षण अस्पष्ट होते हैं, जिसके कारण डॉक्टर को दवाइयों का मिश्रण लिखने की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
समाधान
1.वैकल्पिक उपचार की जानकारी:
डॉक्टरों को मरीजों को केवल दवाइयों के बजाय जीवनशैली में बदलाव, खानपान, और वैकल्पिक उपचार के बारे में भी बताना चाहिए।
2.मरीज की जागरूकता:
मरीजों को यह समझने की आवश्यकता है कि हर बीमारी का इलाज दवाइयों से नहीं होता। कई बार कुछ बीमारियां समय के साथ ठीक हो जाती हैं, और उपचार का उद्देश्य केवल राहत प्रदान करना होता है।
डॉक्टरों को अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर, रोगियों के इलाज में सहयोग करना चाहिए, ताकि केवल दवाइयों पर निर्भर न रहा जाए।