आज की भागदौड़ की जिंदगी में लोगों के गलत खान पान और अधिक एलकोहल इन्टेक से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। भारत में लगभग 10 से 11% लोग डाईबेटीज से पीड़ित हैं। और डायबिटीज के लक्षण अचानक भी दिख सकते हैं। पेनक्रियाज जब पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है या बना हुआ इंसुलिन हमारी बॉडी अब्जॉर्ब नहीं कर पाती है या उसका उपयोग नहीं कर पाती है तो हमारी बॉडी में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ या घाट जाती है, इन्सुलिन एक हॉर्मोन है जो blood sugar को नियंत्रित करता है।जिसे हाइपरग्लाइसीमिया(बढ़ा हुआ सुगर ) भी कहा जाता है। विशेष रूप से नसों और धमनियों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।

लक्षण।
डायबिटीज के लक्षण अचानक हो सकते हैं। टाइप २ डायबिटीज में लक्षण हल्के हो सकते हैं, और वह जल्दी से मालूम नहीं देते कई सालों बाद पता चल पाता है। डायबिटीज के लक्षण कुछ इस प्रकार दिखते हैं।
बहुत ज्यादा प्यास का लगना।
बार बार पेशाब आना।
धुंधला दिखाई देना।
बार बार थकान लगना।

डायबिटीज वाले लोगों को दिल का दौरा और ब्रने स्टोक और किडनी से संबंधित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। और आंखों में खून की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। और खराब ब्लड फ्लो के कारण पैरों में समस्याएं हो जाती हैं जिससे पैरों का अल्सर हो सकता है।

डायबिटीज दो टाइप के होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज
टाइप 1 डायबिटीज
टाइप 1 डाइबिटीज इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज या बचपन में होने वाली डाईबेटिज कहा जाता है। इसमें इंसुलिन का उत्पादन कम हो जाता है और रोजाना इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है। टाइप 1 डाइबिटीज के पेशेंट भारत में अनुमानित 9 से 10 लाख लोग इससे प्रभावित हैं, जिसमे 20 साल से कम उम्र के लगभग 2.3 लाख लोग शामिल हैं। और दुनिया भर में यह संख्या हर साल 6.7 की दर से बढ़ रही है।

टाइप 2 डाइबिटीज।
टाइप 2 डाइबिटीज, आपका शरीर ग्लूकोस एनर्जी को कैसे इस्तेमाल करता है और यह इन्सुलिन के सही इस्तेमाल को रोकती है। अगर सही समय पर इलाज न किया जाए तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। समय समय पर टाइप 2 डाइबिटीज खासकर खून की नसों को गंभीर नुक्सान पहुंचाता है।

टाइप 2 डाइबिटीज में ज्यादा वजन का बढ़ना और ब्यायाम न करना और जेनेटिक कारण भी शामिल हैं। समय समय पर प्रॉपर चेक उप करवाना और ब्लड टेस्ट भी शामिल है।