गूगल और एआई और झोलाछाप डॉक्टरों से सलाह लेकर एंटीबायोटिक खाने वाले लोग बीमार पड रहे हैं, और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ रहा है। यूपी के गोरखपुर एम्स में चार्मरोग विभाग में पिछले 10 महीने में 18 से ज्यादा मामले सामने आए हैं।और गलत तरीके से स्टेमाल की गई एंटीबायोटिक जानलेवा साबित हो रही हैं।

गूगल और AI या झोलाछाप से पूछकर दवाई लेने वाले लोगों की सेहत बिगड रही है और उन्हें imergency में भर्ती करना पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने गूगल और AI की मदद से एंटीबायोटिक ली थी और कुछ लोगों ने झोलाछाप या मेडिकल स्टोर से दवाई ली थी। और इसके बाद इनकी सेहत बिगाड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
डॉक्टर सुनील गुप्ता ने बताया किएंटीबायोटिक का रिएक्शन कब जानलेवा हो जाए, कहा नहीं जा सकता अध्ययन में पता चला है कि सल्फोनामाइड ग्रुप की एंटीबायोटिक का रिएक्शन सबसे अधिक होता है। डॉक्टर सुनील ने बताया कि मेडिकल स्टोर वाले भी मरीजों की समस्या पूछकर गूगल या एआई की मदद से दवाई देते हैं। जो मरीज़ों की परेशानी और बढ़ा देते हैं।
डॉक्टर सुनील ने बताया कि बिहार के एक मरीज को चर्मरोग से संबंधित दिक्कत थी और उसने मेडिकल स्टोर से सल्फोनामाइड ग्रुप की एंटीबायोटिक खाई थी, मरीज को दवा लेने के कुछ ही घंटों बाद उसका शरीर काला पड़ गया और जब इलाज के लिए एम्स आया तो उसका शरीर पूरी तरह से काला पड़ चुका था। करीब 15 दिनों तक भर्ती करके के बाद ठीक हुआ।
डॉक्टरों का मानना है कि सामान्य दवाओं का रिएक्शन कम होता है और एंटीबायोटिक दवाओं का रिएक्शन अधिक होता है। एक सर्वे में पाया गया कि गूगल और एआई का स्टेमल करके दवाइ लेने का चलन बढ़ा है। अक्सर गाँव देहात के लोग झोलाछाप डॉक्टरों का मेडिकल स्टोर से दवाई लेना पसंद करते हैं। जो की उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
एक एडवाइज़री जारी की गई और बताया गया कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह से एन करें।
किसी भी दवाई का रिएक्शन हो तो आप इस नंबर पर रिएक्शन की जानकारी दे सकते हैं।
Adverse drug reaction indian pharmacopoeia स्वस्थ्य कल्याड़ मंत्रालय के पोर्टल पर जानकारी दे सकते हैं।
टोल फ्री न.18001803024 पर रिएक्शन से सम्बंधित जानकारी साझा कर सकते हैं।
गांव देहात के लोग अक्सर झोलाछाप या मेडिकल स्टोर से दवाई लेते हैं। आपको बता दें कि गांव देहात में जो मेडिकल स्टोर चल रहे हैं या जो लोग दवाइयां दे रहे हैं वो लोग सिर्फ प्रैक्टिशनर हैं न की डॉक्टर। और अधिकतर लोगों के पास कोई डिग्री या डिप्लोमा भी नहीं है बहुत काम ही लोगों के पास डिग्री या डिप्लोमा है। हमारे गांव देहात के लोग उन प्रैक्टिशनर्स को डॉक्टर समझ लेते हैं।
गावों में झोलाछाप और मेडिकल प्रैक्टिशनर दे रहे दवाइयां।
गावों में झोलाछाप और मेडिकल प्रैक्टिशनर लोगों को ठीक करने के बजाये और बीमार कर रहे हैं , ऐसा देखा गया है कि हर प्रैक्टिशनर अपनी दवाई में स्टेरॉयड जरूर इस्तेमाल करते हैं और ये स्टेरॉइड बहुत ही खतरनाक और इनके साइड इफ़ेक्ट होते हैं। जैसे Decsomethasone जो की Decadrone के नाम से आती है।
Steroide: इसके साइड इफ़ेक्ट की बात करें तो ये मेडिसिन १५ दिन से ज्यादा नहीं दी जाती है , इसके साइड इफ़ेक्ट जैसे कब्ज होना पेट साफ़ न होना, ज्यादा दिनों तक सेवन के बाद शरीर में सूजन आना आदि।