लन्दन के यूबीसी ओकनागन के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे पौधे का पता लगाया है जो एंटीकैंसर का काम करेगा। शोधकर्ताओ ने बताया कि पौधे एक ऐसे दुर्लभ प्राकृतिक यौगिक माइट्रिफिलिन का निर्माण करते हैं। जो एक एंटीकैंसर का काम करता है। शोधकर्ताओं ने दो ऐसे एंजाइम की पहचान की है जो कैंसर के अणुओं को उनके अंतिम रूप में आकार देने का काम करते हैं। यह खोज चिकित्स्या के कुशल रसायनज्ञ के रूप में उजागर करती है और माइट्रिफिलिन और सम्बंधित यौगिकों का उत्पादन आसान बनाती है।

शोधकर्ताओं ने यह भी पता लगाया कि पौधे माइट्रिफिलिन का निर्माण कैसे करते हैं, जो कि एक दुर्लभ रसायन है। माईट्रिफिलिन एक ऐसे पौधों से प्राप्त किया जाता है, जो असामान्य ग्रुप से आते हैं। जिसे स्पाइरोक्सिडोल अल्केलॉइड के रूप में भी जाना जाता है।
यह एक शक्तिशाली एंटी ट्यूमर एवं एंटीइन्फ्लामेट्री का काम करते हैं। जो कैंसर जैसे लाइलाज़ बीमारी को ठीक करने में काफी हदतक सहायक होते हैं।
डॉ. थू थुइ डांग के नेतृत्व में सन २०२३ में ओमान के इर्विंग बार्बर फैकेल्टी ऑफ़ साइंस की टीम ने ज्ञांत पौधों के एंजाइम की पहचान की जो इन अणुओं में पाए जाने वाले स्पैरो आकार का प्रोडक्शन करने के लिए सछम हैं। इस प्राकृतिक उत्पाद मैट्रोफिलिन बनाने के लिए दो एंजाइम रेस्पोंसिबल होते हैं, जिसमे एक अणुओं की सही संरचना को ब्यवस्थित करता है और दूसरा उसमे आकार देने के लिए सछम है।
डॉ. डांग ने बताया कि यह एक जटिल प्रक्रिया है प्रकृति इन अणुओं का निर्माण कैसे करती है और हमें उस प्रकिया को दोहराने का एक नया तरीका देती है। डॉ. डाँग ने बताया कि यह एक असेम्बली लाइन में गायब कड़ियों को खोजने की तरह है।
माइट्रिफिलिन प्राप्त करना है कठिन टास्क।
कई प्रकार के यौगिकऔर कई प्रकार केइनग्रेडिएंट्स पौधों में पाए जाते हैं यह प्रकृति का नेचर है प्रकृति ने पौधों को भरपूर मात्रा में इनग्रेडिएंट्सऔर कई प्रकार के यौगिक दिए हैं। माइट्रिफिलिन इसका प्रमुख उदाहरण है यह केवल उष्णकटिबंधीय पौधे जैसे मैट्रागिना और अंकारिया में पाया जाता है। और यह पौधे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाते हैं।
डॉ. थुइ डांग का कहना है कि एक ग्रीन केमिस्ट्री तरिका ही इस खोज तक पहुंचाता है। और यह खोज वातावरण का परिणाम है। जो ब्यक्तिगत प्रभाव पर जोर डालता है।